ॐ...
सभी मित्रो को सादर नमस्कार,
आज में कुछ ऐसी बातें आपके समक्ष रखूँगा जो आप जानते होंगे, परन्तु इसकी अनदेखी कर देते होंगे। हमें स्वस्थ रहना है तो पहले पेट का ध्यान रखना है। ९० प्रतिशत रोग केवल पेट से होते है। पेट में कब्ज़ नहीं रहना चाहिए, अन्यथा रोगो की कभी कमी नहीं होगी। यद्यपि हमने अपने पेट का अच्छा ध्यान रखा, तब कोई बात नहीं। परन्तु अगर नहीं रखा तो बीमारीओं की कतार लग जाएगी। पेट को कोई तकलीफ न हो, इसलिए में ध्यान रखने वाली बातें बताता हूँ । ये बाते दो श्रेणी में बाटता हूँ। एक - जो हमे करना चाहिए और दूसरा जो हमें नहीं करना चाहिए। निम्न लिखित सारी बातें अलग अलग श्रोत से ली गई है जैसे अ. ब. श्री राजीव दीक्षित जी के व्याख्यान, कुछ पुस्तकें और कुछ दोस्तों दुवारा भेजे गए सन्देश।
प्रथम : यह ज़रूर करें।
१. भोजन पकने के ४८ मिनट के अंदर खा लेना चाहिए। उसके पश्चात उसकी पोषकता कम होने लगती है।
१२ घंटे के बाद पशुओं के खाने लायक भी नहीं रहता। इसका तात्पर्य यह है की आप भोजन गर्म गर्म ही
खाये।
२. भोजन को मिटटी के बर्तन में ही पकाएं क्योंकि मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाने से, भोजन की पोशकता
१०० % बच जताई है। वही काँसे के बर्तन में ९७%, पीतल के बर्तन में ९३%, एल्युमीनियम और प्रेशर कुकर
में केवल ७ - १३ % ही बचता है।
३. कोई भी पुराना आटा उपयोग नही करना चाहिए। गेहूँ का आटा १५ दिनों पुराना और चना, ज्वार, बाजरा,
मक्का, का आटा ७ दिनों से अधिक पुराना प्रयोग नहीं करना चाहिए।
४. प्रातः का भोजन राजकुमार के समान, दोपहर का भोजन राजा के सामान और रात्रि का भोजन भिखारी के
समान। उदाहरण के लिए : सुबह ४ रोटी, दोपहर को २ रोटी और रात को १ रोटी खाना चाहिए। यह मात्रा है,
आप इस मात्रा में कुछ भी खा सकते है।
५. मुल्हठी चूसने से कफ बहार आता है और आवाज़ मधुर।
६. जल सदैव ताज़ा ही पिए। बोतलबंद (फ्रीज़ ) पानी बासी और अनेक रोगों के कारण होता है। आर ओ का
पानी बहुत अमलीय (एसिडिक) होता है, इसलिए इसका उपयोग न करें। यूरोप में और बहुत सारे देशों में
आर ओ के मशीन पर बैन लगा हुआ है।
७. नींबू गंदे पानी के रोग (यकॄत, टाइफाइड, दस्त, पेट के रोग ) तथा हैजा से बचाता है। प्रति दिन एक निम्बू
का सेवन ज़रूर करें।
८. चोकर खाने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है। इसलिए सदैव गेहू मोटा ही पिसवाना चाहिए।
९. १४ वर्ष से काम आयु के बच्चों को मैदा (बिस्कुट, ब्रेड,समोसा आदि ) कभी नहीं खिलाना चाहिए।
१०. जल जाने पर आलू का रस, हल्दी, शहद, घृतकुमारी में से कुछ भी लगाने से जलन ठीक हो जाती है और
फफोले नहीं पड़ते।
११. सरसों, तिल, मूंगफली या नारियल का तेल ही खाना चाहिए। देशी घी ही खाना चाहिए। रिफाइंड तेल और
वनस्पति घी (डालडा) जहर है।
१२. पैर के अंगूठे के नाख़ून को सरसों तेल से भिगोने से आंखों के खुजली, लाली और जलन ठीक हो जाती है।
१३. खाने का चुना ७० रोगो को ठीक करता है।
१४. चोट, सूजन, दर्द, घाव, फोड़ा होने पर, उस पर ५-२० मिनट तक चुम्बक रखने से जल्दी ठीक होता है।
हड्डी टूटने पर चुम्बक का प्रयोग करने से आधे से भी कम समय में ठीक होती है।
१५. मिठे में मिश्री, गुड़, शहद, देसी (कच्ची) चीनी का प्रयोग करना चाहिए। सफ़ेद चीनी जहर है।
१६. रात्रि में ८ घंटे की नींद लेनी चाहिए। निरोगी रहने लिए अच्छी नींद और अच्छा भोजन अत्यंत आवश्यक है।
द्वितीय :- यह न करें।
१. भोजन के पश्चात तुरंत जल ग्रहण करने से १०३ रोग होते है, अतः भोजन के १ अथवा डेड घंटे के बाद ही जल
का सेवन करें। भोजन ग्रहण करने के पश्चात उसमें अमलीय पदार्थ मिलता है जो पाचन के लिए बहुत ज़रूरी
है। यदि हमने उसमें पानी मिला दिया, तब वह सड़ने लगेगा। १ से डेढ़ घंटे के बाद पानी पिने से पाचन क्रिया
अच्छी होती है।
२. शस्त्रों अनुसार भोजन तब पकता है, जब उसे पवन का स्पर्श और सूर्य की रौशनी मिलना ज़रूरी है। अन्यथा
वह भोजान ग्रहण करना उचित नहीं। इसका सीधा तात्पर्य यह है के आजकल जो भी भोजन कुकर में बनता
है, वह भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए। अच्छा यही होगा के हर घर से कुकर निकाल दिया जाए।
३. एल्युमीनियम के बर्तन में कभी भी भोजन नहीं करना चाहिए। जब हम भोजन एल्युमीनियम के बर्तन में
पकाते है या एल्युमीनियम के बर्तन में पानी पिटे है, तब कुछ मात्रा में एल्युमीनियम हमारे भोजन के साथ
हमारे शरीर में आ जाता है। इसके गुण कुछ ऐसे है जो हमारा शरीर इसे पचा नहीं सकता और शरीर के
बहार भी नहीं निकालता। जिससे हमारे शरीर को बहुत ही हानि होती है।
४. सौ से भी ज़्यादा रोग केवल मासाहार से होते है , अतः इसका त्याग करें। जब किसी भी प्राणी को मरा जाता
है, तब वह भयभीत हो जाता है। जिससे उसके शरीर में भारी मात्रा में अमल (एसिड) बनता है। उसकी मृत्यु
के पश्चात जब उसका अमलीय मास खाया जाता है, तब वह मानव शरीर के लिए बहुत ही हानि कारक होता
है।
५. भारतीय वातावरण के अनुसार ठन्डे जल का सेवन अथवा आइसक्रीम खाना, एक बड़ी समस्या बन सकती
है। इसका सेवन करने से बड़ी आंत सिकुड़ सकती है, जिससे मल को बहार निकलने में तकलीफ होती है।
इसके अतिरिक्त हमारे शरीर को अधिक ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है ठन्डे पानी को सम तापमान पे लेने के
लिए।
६. भोजन के पश्चात स्नान करने से पाचनशक्ति मंद होती है और शरीर कमज़ोर हो जाता है। यदि स्नान करना
बहुत ज़रूरी है, तो कम से कम १ घंटे के पश्चात करें। ध्यान दे के यह प्रतिदिन की क्रिया न हो। महीनो में
कभी १ या २ बार ठीक है।
७. स्नान कभी भी गर्म जल से नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति में कमी होती है
और शरीर कमज़ोर हो जाता है। गर्म जल सिर पर डालने से ऑंखें कमजोर हो जाती हैं।
८. यदि भोजन पकने के बाद, उसमें नमक डाला गया है, तब इससे रक्तचाप (ब्लड प्रेशर ) बढ़ता है। इसलिए
कभी भी भोजन पकने के पश्चात उसमें नमक न डालें।
९. शराब, कोल्ड्रिंक्स और चाय का सेवन करने से ह्रदय की बीमारियां होती है। यह सारी चीजें शरीर में अमलीय
मात्रा बढ़ाने का काम करती है। अधिक अमलीय शरीर, बीमारियों का घर होता है।
१०. मैगी, गुटखा, शराब, सूअर का मॉस, पिज़्ज़ा, बर्गर, बीड़ी, सिगरेट, पेप्सी, कोक से बड़ी आंत सड़ती है। आगे
जाकर यह मलद्वार पर भी पीड़ा देती है।
११. दूध (चाय, कॉफ़ी, मिल्कशेक इत्यादि) साथ नमक (नमकीन पदार्थ) का सेवन करने से चर्म रोग होते है। ये
दोनों विरोधाभाषी पदार्थ हैं, इनका सेवन एक साथ न करें।दूध के साथ प्याज का सेवन भी चर्म रोग या सफ़ेद
दाग पैदा करता है।
१०. ज़्यादा देर टाई बांधने से आंखों और मस्तिष्क को हानि पहुँचती है। जबभी टाई पहने, ढीला ही पहने।
११. खड़े होकर जल पिने से घुटनों (जोड़ों )में पीड़ा होती है। खड़े होकर भोजन करने से पुरुषों को प्रोस्ट्रेट तथा
महिलाओ को ओवेरियन (बच्चे दानी ) के रोग हो सकते है। गंभीर रोगों में कैंसर जैसे रोग भी होते है। खड़े
होकर मूत्र-त्याग करने से रीड हड्डी को हानि है।
१२. सूर्यास्त के पश्चात कभी भी भोजन नहीं करना चाहिए। न तो पढ़ने का और न ही लिखने का काम करना
चाहिए । देर रात तक जागने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कमज़ोर हो जाती है। भोजन का पाचन भी ठीक
से नहीं हो पाता है, आंखों के रोग भी होते है।
१३. मीठा, मिठाई, कोई भी फल, घी या तेल से बने पदार्थ खाकर, जल नहीं पीना चाहिए। जल पिने से सर्दी या
कफ होने की आशंका रहती है।
- गव्यसिद्धा अमिताभ भटनागर
amitabh_bhatnagar@gavyachetna.com
MD &CEO
मलती गौषधि प्रा ली
www.gavyachetna.com
सभी मित्रो को सादर नमस्कार,
आज में कुछ ऐसी बातें आपके समक्ष रखूँगा जो आप जानते होंगे, परन्तु इसकी अनदेखी कर देते होंगे। हमें स्वस्थ रहना है तो पहले पेट का ध्यान रखना है। ९० प्रतिशत रोग केवल पेट से होते है। पेट में कब्ज़ नहीं रहना चाहिए, अन्यथा रोगो की कभी कमी नहीं होगी। यद्यपि हमने अपने पेट का अच्छा ध्यान रखा, तब कोई बात नहीं। परन्तु अगर नहीं रखा तो बीमारीओं की कतार लग जाएगी। पेट को कोई तकलीफ न हो, इसलिए में ध्यान रखने वाली बातें बताता हूँ । ये बाते दो श्रेणी में बाटता हूँ। एक - जो हमे करना चाहिए और दूसरा जो हमें नहीं करना चाहिए। निम्न लिखित सारी बातें अलग अलग श्रोत से ली गई है जैसे अ. ब. श्री राजीव दीक्षित जी के व्याख्यान, कुछ पुस्तकें और कुछ दोस्तों दुवारा भेजे गए सन्देश।
प्रथम : यह ज़रूर करें।
१. भोजन पकने के ४८ मिनट के अंदर खा लेना चाहिए। उसके पश्चात उसकी पोषकता कम होने लगती है।
१२ घंटे के बाद पशुओं के खाने लायक भी नहीं रहता। इसका तात्पर्य यह है की आप भोजन गर्म गर्म ही
खाये।
२. भोजन को मिटटी के बर्तन में ही पकाएं क्योंकि मिट्टी के बर्तन में भोजन पकाने से, भोजन की पोशकता
१०० % बच जताई है। वही काँसे के बर्तन में ९७%, पीतल के बर्तन में ९३%, एल्युमीनियम और प्रेशर कुकर
में केवल ७ - १३ % ही बचता है।
![]() |
| मिटटी के बर्तन का उपयोग करें |
३. कोई भी पुराना आटा उपयोग नही करना चाहिए। गेहूँ का आटा १५ दिनों पुराना और चना, ज्वार, बाजरा,
मक्का, का आटा ७ दिनों से अधिक पुराना प्रयोग नहीं करना चाहिए।
४. प्रातः का भोजन राजकुमार के समान, दोपहर का भोजन राजा के सामान और रात्रि का भोजन भिखारी के
समान। उदाहरण के लिए : सुबह ४ रोटी, दोपहर को २ रोटी और रात को १ रोटी खाना चाहिए। यह मात्रा है,
आप इस मात्रा में कुछ भी खा सकते है।
५. मुल्हठी चूसने से कफ बहार आता है और आवाज़ मधुर।
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| मुल्हठी - Mulethi |
६. जल सदैव ताज़ा ही पिए। बोतलबंद (फ्रीज़ ) पानी बासी और अनेक रोगों के कारण होता है। आर ओ का
पानी बहुत अमलीय (एसिडिक) होता है, इसलिए इसका उपयोग न करें। यूरोप में और बहुत सारे देशों में
आर ओ के मशीन पर बैन लगा हुआ है।
७. नींबू गंदे पानी के रोग (यकॄत, टाइफाइड, दस्त, पेट के रोग ) तथा हैजा से बचाता है। प्रति दिन एक निम्बू
का सेवन ज़रूर करें।
८. चोकर खाने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है। इसलिए सदैव गेहू मोटा ही पिसवाना चाहिए।
९. १४ वर्ष से काम आयु के बच्चों को मैदा (बिस्कुट, ब्रेड,समोसा आदि ) कभी नहीं खिलाना चाहिए।
१०. जल जाने पर आलू का रस, हल्दी, शहद, घृतकुमारी में से कुछ भी लगाने से जलन ठीक हो जाती है और
फफोले नहीं पड़ते।
११. सरसों, तिल, मूंगफली या नारियल का तेल ही खाना चाहिए। देशी घी ही खाना चाहिए। रिफाइंड तेल और
वनस्पति घी (डालडा) जहर है।
१२. पैर के अंगूठे के नाख़ून को सरसों तेल से भिगोने से आंखों के खुजली, लाली और जलन ठीक हो जाती है।
१३. खाने का चुना ७० रोगो को ठीक करता है।
१४. चोट, सूजन, दर्द, घाव, फोड़ा होने पर, उस पर ५-२० मिनट तक चुम्बक रखने से जल्दी ठीक होता है।
हड्डी टूटने पर चुम्बक का प्रयोग करने से आधे से भी कम समय में ठीक होती है।
![]() |
| चुम्बक - Magnet |
१५. मिठे में मिश्री, गुड़, शहद, देसी (कच्ची) चीनी का प्रयोग करना चाहिए। सफ़ेद चीनी जहर है।
१६. रात्रि में ८ घंटे की नींद लेनी चाहिए। निरोगी रहने लिए अच्छी नींद और अच्छा भोजन अत्यंत आवश्यक है।
द्वितीय :- यह न करें।
१. भोजन के पश्चात तुरंत जल ग्रहण करने से १०३ रोग होते है, अतः भोजन के १ अथवा डेड घंटे के बाद ही जल
का सेवन करें। भोजन ग्रहण करने के पश्चात उसमें अमलीय पदार्थ मिलता है जो पाचन के लिए बहुत ज़रूरी
है। यदि हमने उसमें पानी मिला दिया, तब वह सड़ने लगेगा। १ से डेढ़ घंटे के बाद पानी पिने से पाचन क्रिया
अच्छी होती है।
२. शस्त्रों अनुसार भोजन तब पकता है, जब उसे पवन का स्पर्श और सूर्य की रौशनी मिलना ज़रूरी है। अन्यथा
वह भोजान ग्रहण करना उचित नहीं। इसका सीधा तात्पर्य यह है के आजकल जो भी भोजन कुकर में बनता
है, वह भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए। अच्छा यही होगा के हर घर से कुकर निकाल दिया जाए।
३. एल्युमीनियम के बर्तन में कभी भी भोजन नहीं करना चाहिए। जब हम भोजन एल्युमीनियम के बर्तन में
पकाते है या एल्युमीनियम के बर्तन में पानी पिटे है, तब कुछ मात्रा में एल्युमीनियम हमारे भोजन के साथ
हमारे शरीर में आ जाता है। इसके गुण कुछ ऐसे है जो हमारा शरीर इसे पचा नहीं सकता और शरीर के
बहार भी नहीं निकालता। जिससे हमारे शरीर को बहुत ही हानि होती है।
| एल्युमीनियम का प्रयोग खान-पान में न करें |
४. सौ से भी ज़्यादा रोग केवल मासाहार से होते है , अतः इसका त्याग करें। जब किसी भी प्राणी को मरा जाता
है, तब वह भयभीत हो जाता है। जिससे उसके शरीर में भारी मात्रा में अमल (एसिड) बनता है। उसकी मृत्यु
के पश्चात जब उसका अमलीय मास खाया जाता है, तब वह मानव शरीर के लिए बहुत ही हानि कारक होता
है।
| मासाहार का सेवन न करें |
५. भारतीय वातावरण के अनुसार ठन्डे जल का सेवन अथवा आइसक्रीम खाना, एक बड़ी समस्या बन सकती
है। इसका सेवन करने से बड़ी आंत सिकुड़ सकती है, जिससे मल को बहार निकलने में तकलीफ होती है।
इसके अतिरिक्त हमारे शरीर को अधिक ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है ठन्डे पानी को सम तापमान पे लेने के
लिए।
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| ठन्डे पेय का बहिष्कार करें। यह स्वस्थ के लिए हानिकारक है। |
६. भोजन के पश्चात स्नान करने से पाचनशक्ति मंद होती है और शरीर कमज़ोर हो जाता है। यदि स्नान करना
बहुत ज़रूरी है, तो कम से कम १ घंटे के पश्चात करें। ध्यान दे के यह प्रतिदिन की क्रिया न हो। महीनो में
कभी १ या २ बार ठीक है।
७. स्नान कभी भी गर्म जल से नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति में कमी होती है
और शरीर कमज़ोर हो जाता है। गर्म जल सिर पर डालने से ऑंखें कमजोर हो जाती हैं।
८. यदि भोजन पकने के बाद, उसमें नमक डाला गया है, तब इससे रक्तचाप (ब्लड प्रेशर ) बढ़ता है। इसलिए
कभी भी भोजन पकने के पश्चात उसमें नमक न डालें।
९. शराब, कोल्ड्रिंक्स और चाय का सेवन करने से ह्रदय की बीमारियां होती है। यह सारी चीजें शरीर में अमलीय
मात्रा बढ़ाने का काम करती है। अधिक अमलीय शरीर, बीमारियों का घर होता है।
| मदिरा, ठन्डे पेय व चाय/कॉफ़ी का त्याग करें। |
१०. मैगी, गुटखा, शराब, सूअर का मॉस, पिज़्ज़ा, बर्गर, बीड़ी, सिगरेट, पेप्सी, कोक से बड़ी आंत सड़ती है। आगे
जाकर यह मलद्वार पर भी पीड़ा देती है।
११. दूध (चाय, कॉफ़ी, मिल्कशेक इत्यादि) साथ नमक (नमकीन पदार्थ) का सेवन करने से चर्म रोग होते है। ये
दोनों विरोधाभाषी पदार्थ हैं, इनका सेवन एक साथ न करें।दूध के साथ प्याज का सेवन भी चर्म रोग या सफ़ेद
दाग पैदा करता है।
१०. ज़्यादा देर टाई बांधने से आंखों और मस्तिष्क को हानि पहुँचती है। जबभी टाई पहने, ढीला ही पहने।
११. खड़े होकर जल पिने से घुटनों (जोड़ों )में पीड़ा होती है। खड़े होकर भोजन करने से पुरुषों को प्रोस्ट्रेट तथा
महिलाओ को ओवेरियन (बच्चे दानी ) के रोग हो सकते है। गंभीर रोगों में कैंसर जैसे रोग भी होते है। खड़े
होकर मूत्र-त्याग करने से रीड हड्डी को हानि है।
१२. सूर्यास्त के पश्चात कभी भी भोजन नहीं करना चाहिए। न तो पढ़ने का और न ही लिखने का काम करना
चाहिए । देर रात तक जागने से शरीर की प्रतिरोधक शक्ति कमज़ोर हो जाती है। भोजन का पाचन भी ठीक
से नहीं हो पाता है, आंखों के रोग भी होते है।
१३. मीठा, मिठाई, कोई भी फल, घी या तेल से बने पदार्थ खाकर, जल नहीं पीना चाहिए। जल पिने से सर्दी या
कफ होने की आशंका रहती है।
- गव्यसिद्धा अमिताभ भटनागर
amitabh_bhatnagar@gavyachetna.com
MD &CEO
मलती गौषधि प्रा ली
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