ॐ.....
नवरात्रि के साथ ही देश में त्योहारों का मौसम शुरू हो जाता है। दशहरा ठीक २० दिन बाद दिवाली आती है।
आज हम त्रियोदशी, के बारे में बात करेंगे । यह दिन प्रति माह दो बार आता है। एक शुक्ल पक्ष मे और दूसरा कृष्ण पक्ष मे। यह किसी भी पक्ष का तेरहवां दिन होता है। दिवाली से दो दिन पूर्व जो त्रियोदशी आती है, उसे धन्वन्तरि त्रियोदशी कहते है। यह दिवाली पर्व के पाँच दिनों के उत्सव का पहला दिन मना जाता है। इसे धनतेरस के नाम से भी जाना जाता है। यह कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष में मनाया जाता है।
“गौमूत्र धन्वन्तरी” अर्थात गौमूत्र में भगवान धन्वन्तरी का निवास है। धन का मतलब मुद्रा धन ना होकर स्वास्थ्य धन है ओर स्वास्थ्य तभी स्वस्थ होगा जब हमारे जीवन में पंचगव्य का समावेश होगा।
धन्वन्तरि त्रियोदशी का महत्व यमराज को दीप अर्पण करने का भी है, जिसे यमदीपदानं कहते है। यह दान भगवान् श्री यमराज के लिए होता है जो हमें अपमृत्यु से बचाते है। सूर्यास्त होने के बाद एक बड़े मिट्टी के दीये में तिल का तेल लीजिये और उसे प्रगटा दीजिये। इस दीये को,घर से बाहर, दक्षिण दिशा में रख कर निम्नलिखित मंत्र जरूर पढ़िए ।

नवरात्रि के साथ ही देश में त्योहारों का मौसम शुरू हो जाता है। दशहरा ठीक २० दिन बाद दिवाली आती है।
आज हम त्रियोदशी, के बारे में बात करेंगे । यह दिन प्रति माह दो बार आता है। एक शुक्ल पक्ष मे और दूसरा कृष्ण पक्ष मे। यह किसी भी पक्ष का तेरहवां दिन होता है। दिवाली से दो दिन पूर्व जो त्रियोदशी आती है, उसे धन्वन्तरि त्रियोदशी कहते है। यह दिवाली पर्व के पाँच दिनों के उत्सव का पहला दिन मना जाता है। इसे धनतेरस के नाम से भी जाना जाता है। यह कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष में मनाया जाता है।
“गौमूत्र धन्वन्तरी” अर्थात गौमूत्र में भगवान धन्वन्तरी का निवास है। धन का मतलब मुद्रा धन ना होकर स्वास्थ्य धन है ओर स्वास्थ्य तभी स्वस्थ होगा जब हमारे जीवन में पंचगव्य का समावेश होगा।
धन्वन्तरि त्रियोदशी का महत्व यमराज को दीप अर्पण करने का भी है, जिसे यमदीपदानं कहते है। यह दान भगवान् श्री यमराज के लिए होता है जो हमें अपमृत्यु से बचाते है। सूर्यास्त होने के बाद एक बड़े मिट्टी के दीये में तिल का तेल लीजिये और उसे प्रगटा दीजिये। इस दीये को,घर से बाहर, दक्षिण दिशा में रख कर निम्नलिखित मंत्र जरूर पढ़िए ।
मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह।
त्रयोदश्यां दीपदानात्सूर्यजः प्रीयतां मम ।।
इस दिन, भारत में धन के भगवान "कुबेर" जी की भी पूजा की जाती है। धनतेरस के दिन ही, सागर मंथन से लक्ष्मी जी की उत्पत्ति हुई थी। इसी लिए, धनतेरस के दिन, दोनों, कुबेर और लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है। द्रिकपञ्चाङ्ग के अनुसार, धनतेरस की पूजा, सूर्यास्त के समय, प्रदोष काल में करें । प्रदोष काल २ घंटे और २४ मिनट का होता है। "स्थिर लग्न" सबसे अच्छा समय है, धनतेरस की पूजा के लिए। यह मान्यता है की लक्ष्मी देवी, इसी समय, हमारे घर में वास करतीं है।
धनतेरस के दिन, भारत में, सांकेतिक रूप से सोना, चांदी, गहना या कोई भी नई चीज खरीदते है। आज के दिन की खरीदारी को शास्त्रों में बहुत अच्छा माना गया है।
सभी हरीभक्तों को पाँच दिवसीय महापर्व दीपोत्सव की हार्दिक मंगलकामना...
भगवान् श्री कुबेर और माँ लक्ष्मी आपके घर परिवार को धन सम्पदा, सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य,वैभव प्रदान करे ...
घर आँगन में धन धान्य भरे और खेतों हरियाली हो।
सब सुख के साधन मिले तुम्हे हर तरफ दिव्य खुशियाली हो।
ऐश्वर्य बढ़े अरोग्य रहो दिन दूनी प्रगति तुम्हारी हो,
धन त्रियोदशी सबके घर में सुख सम्पति देने वाली हो।
धनतेरस के दिन, भारत में, सांकेतिक रूप से सोना, चांदी, गहना या कोई भी नई चीज खरीदते है। आज के दिन की खरीदारी को शास्त्रों में बहुत अच्छा माना गया है।
सभी हरीभक्तों को पाँच दिवसीय महापर्व दीपोत्सव की हार्दिक मंगलकामना...
भगवान् श्री कुबेर और माँ लक्ष्मी आपके घर परिवार को धन सम्पदा, सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य,वैभव प्रदान करे ...
घर आँगन में धन धान्य भरे और खेतों हरियाली हो।
सब सुख के साधन मिले तुम्हे हर तरफ दिव्य खुशियाली हो।
ऐश्वर्य बढ़े अरोग्य रहो दिन दूनी प्रगति तुम्हारी हो,
धन त्रियोदशी सबके घर में सुख सम्पति देने वाली हो।
अमिताभ भटनागर
मद& सीईओ
मलती गौषधि प्रा ली
www.gavyachetna.com
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