Monday, 12 November 2018

Helplessness of Western civilization - our stupidity... (पाश्चात्य सभ्यता की लाचारी - हमारी मूर्खता)

ॐ...

कभी कभी में यह सोचता हूँ की हम पाश्चात्य व्यवस्था की नकल करते करते ओर कितना अपने आप की निचा गिराएंगे।हमारा जन्म उस धरती पे हुआ है जहाँ साल के ६ मौसम है, जहाँ हर मौसम में हमें मीठे फल मिलते है।

"ऍन एप्पल ए डे, कीप्स ध डॉक्टर अवे"... यह कहावत तो सुनी होगी आपने। यूरोप में एप्पल (सेब) के पेड़ हर मौसम में उगते है। यह एक मात्र फल है जो यूरोप में साल भर मिलता है। इसलिए उनकी विवशता है उसे खाने की, परन्तु भारत में हर मौसम में भिन्न भिन्न प्रकार के फल मिलते है, फिर हम क्यों एप्पल के पीछे लगे रहते है।
हमें ताज़ा और मौसमी फल का सेवन करना चाहिए नकी एप्पल। एक ओर बात, एप्पल भारतीय नहीं है। इसे सैमुएल इवान स्टोक्स नामक अंग्रेज़, १९१६ में लाया था।

कुछ ओर कड़वी बातें जो धयान मांगती है :-

👉 साल का लम्बा समय ठण्ड के कारण, कोट पैंट पहनना पाश्चात्य सभ्यता की विवशता और शादी वाले दिन
      भरी गर्मी में कोट - पैंट डाल कर बरात ले जाना, हमारी मूर्खता।

👉 ताजा भोजन उपलब्ध ना होने के कारण, पिज्जा, बर्गर, नूडल्स खाना यूरोप की विवशता और 56 भोग छोड़
      कर ₹ 200-400/- की सड़ी रोटी (पिज्जा ) खाना, हमारी मूर्खता।

👉 ताज़ा भोजन की कमी के कारण फ्रीज़ इस्तेमाल करना, यूरोप की विवशता और रोज ताजी सब्जी बाजार में
      मिलनें पर भी, हफ्ते भर की सब्जी फ्रीज में ठूँस सड़ा कर खाना, हमारी मूर्खता।

👉 प्रोटीन के नाम पर वहाँ एक ही चीज मिलती है, वह है अंडा। बीमारी के समय उन्हें प्रोटीन के लिए अंडा
      खाना मजबूरी है।  परन्तु प्रोटीन से भरपूर दालें (पल्सेस) होने के बावजूद भारत में डॉक्टर अंडा खाने के लिए
      कहतें हैं। यह हमारी मूर्खता है।

👉 जड़ी - बूटियों का ज्ञान ना होने के कारण, जीव जन्तुओं के माँस से दवायें बनाना, उनकी विवशता और
      आयुर्वेद जैसा महान चिकित्सा होने के बावजूद, माँस की दवाईयाँ उपयोग करना, हमारी मूर्खता।

👉 पर्याप्त अनाज ना होने के कारण जानवरों को खाना, उनकी विवशता और कई किस्मों की फसलें होनें के
      पश्चात, केवल स्वाद के लिए प्राणी मार कर खाना, हमारी मूर्खता।

👉 फलों का शुद्ध रस, लस्सी,मट्ठा, छाछ, दूध,  शिकंजी आदि ना होने के कारण, कोल्ड ड्रिंक पीना उनकी
       विवशता और 36 तरह के पेय पदार्थ होते हुऐ भी, कोल्ड ड्रिंक नामक जहर पी कर खुद को आधुनिक
       समझना, हमारी मूर्खता।


👉 आयुर्वेद के माध्यम से मौसमी और स्थानीय फल का सेवन बहुत लाभदायक होता है, परन्तु हम कीवी,
       ड्रैगन फ्रूट इत्यादि का सेवन सिर्फ इस लिए करते है, के हमें शो-ऑफ करना होता है। यह हमारी मूर्खता है।

👉 भोजन करने का सही तरीका निचे बैठ के खाना है। परन्तु आजकल पाश्चात्य सभ्यता के प्रभाव से, हम
       भोजन खड़े हो कर करते है।  यह हमारी मूर्खता  है।

👉 पानी का सेवन हमें बैठ के करना चाहिए, यह आयुर्वेद भी कहता  हमारे बुजुर्ग भी, परन्तु आजकल सभी
       खड़े खड़े  है, जैसे पाश्चात्य लोग करते है। यह स्वास्थ की दृष्टि से भी गलत है और हमारी मूर्खता तो है ही।

- गव्यसिद्धा अमिताभ भटनागर
amitabh_bhatnagar@gavyachetna.com
MD &CEO
मलती गौषधि प्रा ली
www.gavyachetna.com

* उपरोक्त विचार केवल लेखक के नहीं है।

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