ॐ...
इस दिन भी जातक को तेल से स्नान करना चाहिए, तत्पश्चात पार्वण श्राध अथवा तर्पण दोपहर में, पूर्वजों के लिए करना चाहिए। सूर्यास्त के पश्चात, दिप प्रज्वलन और लक्ष्मी पूजन करना अनिवार्य है।
महिलाओं को इस दिन केदार-गौरी व्रत करना चाहिए जहाँ पानी के कलश में आम के पत्ते व नारियल को स्थापित किया जाता है और शिव जी के अर्धनारेश्वर रूप की पूजा की जाती है। माँ पार्वती ने शिव जी के अर्धनारेश्वर रूप में, अपने आप को लाने के लिए यह व्रत किया था। यह व्रत २१ दिन का होता है, परन्तु जो महिलाएँ २१ दिन का व्रत नहीं कर सकती, वे इस एक दिन व्रत कर सकतीं है।
दीपावली के उपलक्ष में हम दीप क्यों प्रगटते है और उन्हें बहार क्यों रखते है? और हाँ, फटाके क्यों फूडते है ?
शास्त्रों के अनुसार, हमारे पितृ, जो पितृ पक्ष के समय धरती पर आये है, उन्हें दीप प्रज्वलन से वापस पितृ लोक में जाने का मार्ग दीखता है। तथा फटाके फोड़ ने से पित्रुओं को पितृ लोक में अपने निवास स्थान का मार्ग दिखाई देता है। भारी बम अथवा बड़ी जोर से फूटने वाले पटाखों का उपयोग न करें, यह जाते हुए पित्रुओं को डरा सकता है। इस दिन हमें मंदिर, गली, गौशाला, अस्तबल जैसी जगह पर दिए प्रगटाने चाहिए तथा दान करने चाहिए। निम्नलिखित श्लोक का उच्चारण, दिप प्रगटाते समय करना अनिवार्य है।
पंचगव्य के मुख्य गव्य - गोबर का बहुत महत्व है दीपावली के दिन। पाँच दिन के पर्व में, तृतीय दिवस धन सम्पदा की देवी महालक्ष्मी की आराधना ओर पूजा की जाती है और माँ लक्ष्मी का स्थायीनिवास स्थान पूज्य गोमाता का गोमय (गोबर) है जो हमें संकेत करता है की हम तन मन धन से गोसेवा करें ताकि माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद हम पर सदेव बना रहे।
शास्त्रों में कहा जाता है - गोमय वस्ते लक्ष्मी। और इसका उल्लेख उपनिषदों में भी बार बार किया गया है। आज की वैज्ञानिक दुनिया मे, आप यह सोचते होंगे की गोबर मे लक्ष्मी, धन की देवी, कैसे वास करतीं है ? गोबर से लक्ष्मी कैसे मिलती है ? यदि हम आधुनिक अर्थशास्त्र की द्रिष्टी से देखें तब हमें ज्ञात होगा के हमारी ऋषि-मुनियों ने सार्वजनिक सच्चाई बताई है, जो कोई भी पंथ, देश या समय पर खरी उतरती है। पंचगव्य में बहुत ही पवित्र शक्तियाँ है जो हमारे पाँचो महाभूतों (भूमि, गगन, वायु, आकाश और नीर ) को शुद्ध व पोषीत करता है। दूध,दही, माखन (आज कल बाज़ार में मिलने वाला माखन नहीं, यहाँ जो माखन की बात है वह, बिलोना पद्धति से बनाया हुआ है ), घी और छाछ हमारे लिए सबसे मेधावी और ऊर्जावान पोषण हैं वहीं गोमय (गोबर) तथा गौमूत्र, भूमि को जीवित, उपजाऊ और स्वस्थ रखने के लिए सर्वोत्तम पोषक तत्व हैं।
अमिताभ भटनागर
इस दिन भी जातक को तेल से स्नान करना चाहिए, तत्पश्चात पार्वण श्राध अथवा तर्पण दोपहर में, पूर्वजों के लिए करना चाहिए। सूर्यास्त के पश्चात, दिप प्रज्वलन और लक्ष्मी पूजन करना अनिवार्य है।
महिलाओं को इस दिन केदार-गौरी व्रत करना चाहिए जहाँ पानी के कलश में आम के पत्ते व नारियल को स्थापित किया जाता है और शिव जी के अर्धनारेश्वर रूप की पूजा की जाती है। माँ पार्वती ने शिव जी के अर्धनारेश्वर रूप में, अपने आप को लाने के लिए यह व्रत किया था। यह व्रत २१ दिन का होता है, परन्तु जो महिलाएँ २१ दिन का व्रत नहीं कर सकती, वे इस एक दिन व्रत कर सकतीं है।
दीपावली के उपलक्ष में हम दीप क्यों प्रगटते है और उन्हें बहार क्यों रखते है? और हाँ, फटाके क्यों फूडते है ?
शास्त्रों के अनुसार, हमारे पितृ, जो पितृ पक्ष के समय धरती पर आये है, उन्हें दीप प्रज्वलन से वापस पितृ लोक में जाने का मार्ग दीखता है। तथा फटाके फोड़ ने से पित्रुओं को पितृ लोक में अपने निवास स्थान का मार्ग दिखाई देता है। भारी बम अथवा बड़ी जोर से फूटने वाले पटाखों का उपयोग न करें, यह जाते हुए पित्रुओं को डरा सकता है। इस दिन हमें मंदिर, गली, गौशाला, अस्तबल जैसी जगह पर दिए प्रगटाने चाहिए तथा दान करने चाहिए। निम्नलिखित श्लोक का उच्चारण, दिप प्रगटाते समय करना अनिवार्य है।
अग्निदग्धाश्च ये जीवा येप्यदग्धाः कुल मम।
उज्जवल ज्योतिषा दग्धास्ते यान्तु परमां गतिम्।।
पंचगव्य के मुख्य गव्य - गोबर का बहुत महत्व है दीपावली के दिन। पाँच दिन के पर्व में, तृतीय दिवस धन सम्पदा की देवी महालक्ष्मी की आराधना ओर पूजा की जाती है और माँ लक्ष्मी का स्थायीनिवास स्थान पूज्य गोमाता का गोमय (गोबर) है जो हमें संकेत करता है की हम तन मन धन से गोसेवा करें ताकि माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद हम पर सदेव बना रहे।
| पंचगव्य |
शास्त्रों में कहा जाता है - गोमय वस्ते लक्ष्मी। और इसका उल्लेख उपनिषदों में भी बार बार किया गया है। आज की वैज्ञानिक दुनिया मे, आप यह सोचते होंगे की गोबर मे लक्ष्मी, धन की देवी, कैसे वास करतीं है ? गोबर से लक्ष्मी कैसे मिलती है ? यदि हम आधुनिक अर्थशास्त्र की द्रिष्टी से देखें तब हमें ज्ञात होगा के हमारी ऋषि-मुनियों ने सार्वजनिक सच्चाई बताई है, जो कोई भी पंथ, देश या समय पर खरी उतरती है। पंचगव्य में बहुत ही पवित्र शक्तियाँ है जो हमारे पाँचो महाभूतों (भूमि, गगन, वायु, आकाश और नीर ) को शुद्ध व पोषीत करता है। दूध,दही, माखन (आज कल बाज़ार में मिलने वाला माखन नहीं, यहाँ जो माखन की बात है वह, बिलोना पद्धति से बनाया हुआ है ), घी और छाछ हमारे लिए सबसे मेधावी और ऊर्जावान पोषण हैं वहीं गोमय (गोबर) तथा गौमूत्र, भूमि को जीवित, उपजाऊ और स्वस्थ रखने के लिए सर्वोत्तम पोषक तत्व हैं।
अमिताभ भटनागर
MD &CEO
मलती गौषधि प्रा ली
www.gavyachetna.com
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